Puraanic contexts of words like Khara - Duushana, Kharjura/dates, Khashaa, Khaandava, Khaandikya, Khyaati etc. are given here.

Esoteric aspect of Khaandava/Khandava

Vedic view of Khaandava/Khandava

खर - दूषण वामन ४६.२२, २३ ( खर व दूषण द्वारा शिवलिङ्ग पूजन का उल्लेख ), वायु ७०.४९ ( विश्रवा व पुष्पोत्कटा से खर की तथा विश्रवा व वाका से दूषण की उत्पत्ति का उल्लेख ), कथासरित् ६.३.१३३ ( भैरव द्वारा खर - दूषण वंशोत्पन्न राक्षसी को क्षुधा तृप्ति के उपाय का कथन ) । khara - duushana

 

खरपथ ब्रह्माण्ड १.२.१८.५७ ( पावनी नदी द्वारा सिंचित राज्य ), मत्स्य १२१.५६ ( नलिनी नदी द्वारा सिंचित राज्य ), वायु ४७.५४ ( पावनी नदी द्वारा सिंचित राज्य ) ।

 

खरपाद स्कन्द ४.२.७४.५७ ( खरपाद गण की काशी में वरणा तट पर स्थिति तथा रक्षा का उल्लेख ) ।

 

खररोमा वायु ६९.७४ ( काद्रवेय नागों में से एक ), शिव ५.३२.४७ ( कश्यप व सुरसा के सर्प - पुत्रों में से एक ) ।

 

खरस्वन स्कन्द ७.४.१७.१८ ( दक्षिण दिशा के द्वार रक्षकों में से एक ) ।

 

 

खर्जूर अग्नि २४७.३१ ( खर्जूर आदि वृक्षों को लवणोदक से सींचने का निर्देश ), पद्म १.१८.३४९ ( खर्जूरवन : पुष्कर के निकट फलपुष्पों से युक्त खर्जूर वन की स्थिति का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड २.३.१.८५ ( इन्द्र द्वारा मारे गए वरत्री - पुत्रों के शीर्षों से खर्जूर की उत्पत्ति का उल्लेख ), वायु ६५.८३ /२४.८३ ( शुक्र - पुत्र वरूत्री के पुत्रों का इन्द्र द्वारा संहार करने पर वरूत्री - पुत्रों के शीर्षों के खर्जूर रूप में परिणत होने का उल्लेख ), स्कन्द २.२.४४.६ ( श्रावण मास में खर्जूर द्वारा श्रीहरि की अर्चना का निर्देश ), ६.२५२.२४( चातुर्मास में वरुण की खर्जूरी वृक्ष में स्थिति का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण १.४४१.८६ ( वरुण देवता के खर्जूर वृक्ष के रूप में अवतरण का उल्लेख ), १.१५५.५३ ( अलक्ष्मी के खर्जूर वृक्ष सदृश पद का उल्लेख ), कथासरित् १०.५.३१ ( राजा की आज्ञा से खर्जूर तोडने हेतु प्रेषित मूर्खों द्वारा खर्जूर वृक्षों के छेदन की कथा ) । kharjuura/ kharjura

 

खर्वट मत्स्य २६०.४७ ( खर्वट / पर्वत के समीपस्थ ग्राम में कुमार कार्तिकेय की चतुर्भुज प्रतिमा की स्थापना का उल्लेख ), २८३.३ ( पञ्चलाङ्गल नाम महादान में खर्वट आदि के दान का कथन ), वायु ९१.३० ( उर्वशी के अन्तर्हित होने पर राजा पुरूरवा द्वारा पर्वतों, उपवनों, आखेट स्थानों, खर्वटों / पर्वतों के समीपवर्ती ग्रामों आदि में उर्वशी के अन्वेषण का उल्लेख ), स्कन्द ३.१.४४.१९(खर्वट के तार से युद्ध का उल्लेख),  लक्ष्मीनारायण २.१२.७४ (दैत्यराज दमनक के दूत खर्वट का लोमश ऋषि के आश्रम में आगमन और दमनक के कन्या हरण रूप संदेश को लोमश को सुनाने का वृत्तान्त ) । kharvata

 

खर्वविनायक स्कन्द ४.२.५७.६५ ( अष्ट विनायकों में से एक खर्वविनायक की गङ्गा -वरणा सङ्गम पर स्थिति तथा माहात्म्य ) ।

 

खलति कथासरित् १०.५.४८(खलति / गञ्जा व्यक्ति व युवा की कथा द्वारा मूर्खों की कार्य असिद्धि का कथन ), १०.५.१८० ( केशरहित वैद्य को देखकर भी खलति का वैद्य से केशोत्पादक औषधि मांगकर स्वयं की मूर्खता के परिचय की कथा ) ।

 

खला वायु ७०.६९ ( भद्राश्व व घृताची की दस पुत्रियों में से एक ), ९९.१२६ ( रौद्राश्व व घृताची की दस पुत्रियों में से एक ) ।

 

खलीन ब्रह्माण्ड १.२.३५.२( खलीयान् : शाकल्य देवमित्र के ५ शिष्यों में से एक ), स्कन्द ५.३.२८.१३ ( महेश्वर के रथ के खलीन आदि अङ्गों में रश्मियों, छन्दों की स्थिति का उल्लेख ) ।

 

खलीयान् ब्रह्माण्ड १.२.३५.२ ( वेदविद् शाकल्य के ५ शिष्यों में से एक ), वायु ६०.६४ ( खलीय : शाकल्य के पांच शिष्यों में से एक ) ।

 

खश ब्रह्माण्ड १.२.१८.४६, ५० ( चक्षु व गङ्गा नदियों द्वारा खश प्रभृति जनपदों को प्लावित करने का उल्लेख ), १.२.३१.८३ ( अधर्मियों पर शासन हेतु राजा प्रमति द्वारा खश प्रभृति जातियों के संहार का उल्लेख ), भागवत ९.२०.३० ( भरत द्वारा खश, हूण प्रभृति जाति के राजाओं के वध का उल्लेख ),मत्स्य १४४.५७ ( खस : अधर्मियों पर शासन हेतु राजा प्रमति द्वारा खस प्रभृति जातियों के संहार का उल्लेख  ) । khasha

 

खशा गरुड १.५५.१८ ( भुवनकोश वर्णन के अन्तर्गत भारत के उत्तर पश्चिम में खशा प्रभृति देशों की स्थिति का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड २.३.३.५५, २.३.७.३७ ( दक्ष - पुत्री, कश्यप - पत्नी, यक्ष व राक्षस - माता, पुत्र स्वरूप का वर्णन ), २.३.७.१३२ ( खशा के पुत्र - पुत्रियों के नामों का कथन ), २.३.७.४६७ ( क्रूरशीला रूप में खशा का उल्लेख ), वायु २.८.७२+ /६९.७४ ( कश्यप - पत्नी, यक्ष तथा राक्षस रूप दो पुत्रों की माता , कर्म के अनुसार खशा -पुत्रों का कश्यप द्वारा नाम निरूपण, खशा - पुत्रों की प्रकृति का वर्णन ), विष्णु १.१५.१२४, १.२१.२५ ( कश्यप - पत्नी खसा से यक्ष तथा राक्षसों की उत्पत्ति का उल्लेख ), विष्णुधर्मोत्तर १.१९७.३ ( कश्यप-पत्नी, यक्ष व राक्षस - माता, खशा के वंश का वर्णन ), लक्ष्मीनारायण १.५४.२४ ( खशजातीय विष्णुदास की लीलावती नाम की खशी कन्या का म्लेच्छ युवक द्वारा अपहरण, गणिकाओं की सहायता से खशी का स्वगुरु के आश्रम में गमन, गुरु कृपा से गणिकाओं व खशी की पाप मुक्ति का वृत्तान्त ) । khashaa

 

खस नारद १.५६.७४४( खस देश के कूर्म का पाणिमण्डल होने का उल्लेख ),

 

खसृम पद्म १.६.५९ ( विप्रचित्ति व सिंहिका के नौ पुत्रों में से एक, दनु वंश ), विष्णु १.२१.११( सिंहिका व विप्रचित्ति के अनेक पुत्रों में से एक ) ।

 

 

खाण्डव भागवत १.१५.८ ( खाण्डववन :अग्निदेव की तृप्ति हेतु खाण्डववन के दान का उल्लेख ), १०.५८.२५, १०.७१.४५ (अग्निदेव की प्रसन्नता हेतु खाण्डव वन को प्रदान करने का उल्लेख ), १०.७३.३२ ( खाण्डवप्रस्थ : कृष्ण, अर्जुन तथा भीम का जरासन्ध के वध के पश्चात् खाण्डवप्रस्थ में युधिष्ठिर के समीप गमन का उल्लेख ), महाभारत आदि २२२+ ( अग्निदेव की कृष्ण व अर्जुन से खाण्डववन को भस्म करने हेतु सहायता की याचना, कृष्ण व अर्जुन को शस्त्रास्त्र तथा दिव्य रथ प्रदान करना, खाण्डववन को भस्म करने का वृत्तान्त ), मत्स्य १९५.४० ( भार्गवों का एक आर्षेय प्रवर ), लक्ष्मीनारायण १.३३९.२१ ( खाण्डववन : वृन्दावन के समीपस्थ क्षेत्र खाण्डववन में वृन्दा व विष्णु विवाह के समय वरपक्ष का शिविर लगाने का उल्लेख ) । khaandava/ khandava

Esoteric aspect of Khaandava/Khandava

Vedic view of Khaandava/Khandava

 

खाण्डिक्य अग्नि ३७९.१५ ( राजा केशिध्वज द्वारा खाण्डिक्य जनक को आत्मा सम्बन्धी उपदेश ), नारद १.४६.३७, १.४७ ( अमितध्वज - पुत्र, केशिध्वज द्वारा राज्य से च्युति, केशिध्वज को होमधेनु मरण प्रायश्चित्त विधान का कथन, केशिध्वज से अध्यात्म ज्ञान की प्राप्ति का वृत्तान्त ), भागवत ९.१३.२० ( मितध्वज - पुत्र, केशिध्वज - भ्राता, धर्मशास्त्र के महान् ज्ञाता रूप में उल्लेख ), विष्णु ६.५.८१, ६.६, ६.७ ( अमितध्वज - पुत्र, खाण्डिक्य जनक द्वारा केशिध्वज को ब्रह्म प्राप्ति कारक योगादि का उपदेश ) । khaandikya/ khandikya

 

खात स्कन्द ५.३.१७६.३ ( देवखात : पिङ्गलेश्वर तीर्थ में देवखात निर्माण के कारण व उसमें स्नान के फल का कथन ), ५.३.१८१.२ ( वृषखात : वृषखात तीर्थ की उत्पत्ति व माहात्म्य का वर्णन ; भृगु ऋषि के तप का स्थान ) ; द्र. देवखात । khaata

 

खातनास लक्ष्मीनारायण २.५.३४ ( खातनास आदि दैत्यों द्वारा बाल प्रभु को मारने का उद्योग, षष्ठी देवी द्वारा बाल प्रभु की रक्षा का वृत्तान्त ) ।

 

खाता लक्ष्मीनारायण २.१४.३१ ( विखाता : राक्षसियों और कन्यकाओं के तुमुल युद्ध में विखाता राक्षसी द्वारा वृश्चिकास्त्र के मोचन का उल्लेख ) ।

 

 

खुर महाभारत कर्ण ३४.१०५ ( त्रिपुर वध के समय भगवान् रुद्र द्वारा वृषभ के खुरों को चीरकर दो भागों में विभक्त कर देने का उल्लेख ), स्कन्द ४.२.६१.१६१ ( गोलोक से आई गायों के कोटि खुरों से खुरकर्तरि तीर्थ का निर्माण तथा संक्षिप्त माहात्म्य ), ४.२.८३.१०८ ( वही), ५.३.३९.३२ ( कपिला गौ के खुरों में पन्नगों की स्थिति का उल्लेख ), ५.३.८३.११० ( गौ के खुराग्रों में गन्धर्वों, अप्सराओं आदि के वास का उल्लेख ), ५.३.९२.२२ ( महिषी दान प्रसंग में यम के वाहक महिष के खुरों को आयसी किए जाने का उल्लेख ) । khura

 

खेचर गरुड २.१५.३४(चत्वर पर खेचर के लिए पिण्ड दान का निर्देश), स्कन्द १.३.२.२२.१६ ( तुरङ्ग व सारङ्ग को शाप समाप्ति पर खेचरत्व / विद्याधरत्व की प्राप्ति तथा शाप के हेतु का वर्णन ) ।

 

खेचरी नारद १.६६.११३( सोमेश की शक्ति खेचरी का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड ३.४.३७.१० ( स्व चक्र की रक्षाकारिणी एक देवी ), ३.४.४२.१४ ( खेचरी मुद्रा के निर्माण का कथन ), ३.४.४४.५९ ( वर्ण शक्तियों में से एक ), स्कन्द ४.१.२९.४७ ( गङ्गा सहस्रनामों में से एक ), कथासरित् ३.६.१०५(खेचरी सिद्धि के संदर्भ में कालरात्रि व सुन्दरक का आख्यान, सुन्दरक द्वारा कालरात्रि से खेचर सिद्धि मन्त्र का श्रवण आदि) khechari

 

खेटा मत्स्य १७९.१७ ( अन्धकासुर के रक्तपानार्थ शिव द्वारा सृष्ट अनेक मानस मातृकाओं में से एक  ) ।

 

खं भागवत ६.१.४२( देहधारियों के कर्म के साक्षियों में से एक ), स्कन्द ५.२.६९.५७(खङ्गमेश्वर लिङ्ग दर्शन से सहस्र राजसूय यज्ञों से अधिक फल प्राप्ति),

 

ख्याति अग्नि २०.७ ( दक्ष - कन्या, भृगु - पत्नी, धाता, विधाता तथा लक्ष्मी - माता ), कूर्म १.१३.१ ( दक्ष - कन्या, भृगु- पत्नी, लक्ष्मी, धाता, विधाता की माता, ख्याति वंश का कथन ), ब्रह्माण्ड १.२.९.५२, १.२.११.१ ( दक्ष- पुत्री, भृगु - पत्नी, धाता, विधाता व लक्ष्मी - माता ),  १.२.१९.७५ ( क्रौञ्च द्वीप की सात नदियों में से एक ), १.२.३६.१०८ ( उरु व आग्नेयी के ६ पुत्रों में से एक ), २.३.१०.८७(ख्याति का एकशृङ्गा से साम्य?), भागवत ३.२४.२३( कर्दम मुनि द्वारा स्वपुत्री ख्याति को भृगु को समर्पित करने का उल्लेख ), ४.१.४३ ( भृगु - पत्नी, धाता, विधाता व श्री की माता ), ४.१३.१७ ( उल्मुक तथा पुष्करिणी के ६ पुत्रों में से एक ), ८.१.२७ ( तामस मनु के दस पुत्रों में से एक ), मत्स्य ४.४३ ( उरु व आग्नेयी के ६ पुत्रों में से एक ), ४७.९४ ( शुक्राचार्य - माता तथा भृगु - पत्नी ख्याति देवी द्वारा इन्द्र का स्तम्भन, विष्णु चक्र से देवी की मृत्यु, भृगु द्वारा पुन: संजीवन का वृत्तान्त ), १२२.८८ ( क्रौञ्च द्वीप की सप्तविध गङ्गाओं में से एक ), लिङ्ग १.७०.१९, २० (ईश्वर के अनेक नामों में से एक, ख्याति की निरुक्ति ), वायु ४.३५/ १.४.३२.३३ ( ख्याति शब्द की निरुक्ति ), २८.१ ( भृगु - पुत्री, नारायण - पत्नी, बल व उत्साह - माता ), ४९.६९ ( क्रौञ्च द्वीप की सात गङ्गाओं में से एक ), ६२.४४ ( तामस मनु के दस पुत्रों में से एक ), विष्णु १.७.७, १.१०.२ ( भृगु - पत्नी, धाता, विधाता व लक्ष्मी - माता ), १.१३.७ ( कुरु व आग्नेयी के ६ पुत्रों में से एक ), ३.१.१९ ( तामस मनु के दस पुत्रों में से एक ),   शिव ७.२.४.४९(त्रिनयनप्रिया देवी का रूप), लक्ष्मीनारायण १.४०७.३० ( भृगु - पत्नी, विष्णु कृत ख्याति नाश, भृगु द्वारा ख्याति के उज्जीवन का वर्णन ) । khyaati/ khyati

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