Puraanic contexts of words like Koshala, Koshaambi, Kosala, Kautilya, Kaundinya, Kauthuma, Kaumaara etc. are given here.

कोलिकिल वायु ९९.३६५ ( कोलिकिल नामक शूद्र जातीय राजाओं में विन्ध्यशक्ति नामक राजा के उत्पन्न होने तथा ९६ वर्षों तक पृथ्वी पर राज्य करने का उल्लेख ) ।

 

कोली पद्म १.२८.३१( रतिप्रदा रूप में कोली वृक्ष का उल्लेख ) ।

 

कोल्लक भागवत ५.१९.१६ ( भारतवर्ष का एक पर्वत ) ।

 

कोल्हापुर पद्म ६.१८६.१ ( महालक्ष्मी से विराजित कोल्हापुर नगर की शोभा का वर्णन, गीता के बारहवें अध्याय के माहात्म्य का प्रसंग ) ; द्र. कोलापुर

 

कोविद भागवत ५.२०.१६ ( कुश द्वीप वासी कुशल, कोविद, अभियुक्त तथा कुलक वर्ण के पुरुषों द्वारा अग्नि स्वरूप श्रीहरि के यजन का उल्लेख ) ।

 

कोविदार भविष्य १.५७.१२( भास्कर हेतु कोविदार बलि का उल्लेख ), मत्स्य १७९.३० ( कोविदारी : अन्धकासुर के रक्तपानार्थ महादेव द्वारा सृष्ट अनेक मानस मातृकाओं में से एक ) ।

 

कोश लक्ष्मीनारायण २.२५५.४२ ( शरीर में रोम आदि ६ कोशों का कथन ; कोशों के तीन भावों क्लेद्यता आदि का कथन ) ; द्र. उपकोशा, क्रोश, धनिष्ठकोश ।

 

कोशकरण मत्स्य १६३.६६ (ऋषियों तथा वीर पुरुषों द्वारा सेवित कोशकरण नामक नगर को हिरण्यकशिपु द्वारा कम्पित करने का उल्लेख ) ।

 

कोशकार वामन ९०.२२ ( मुद्गल - पुत्र, धर्मिष्ठा - पति, निशाकर - पिता, निशाकर द्वारा स्वपिता कोशकार को मूकता, जडता तथा अन्धत्व ग्रहण के हेतु का कथन ) ।

 

कोशल गर्ग ५.१७.३२ ( कृष्ण विरह पर कोशल प्रान्तवासिनी गोपियों के उद्गारों का कथन ), ७.१८.५ ( कोशल जनपद के राजा नग्नजित् द्वारा प्रद्युम्न के पूजन तथा भेंट प्रदान का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड १.२.१६.४१( भारत के मध्यदेशीय जनपदों में से एक ), १.२.१६.६४ ( भारत के विन्ध्यपृष्ठीय जनपदों में से एक ), २.३.७४.१९७ ( देवरक्षितों द्वारा कोशल प्रभृति जनपदों के शासित होने का उल्लेख ), वामन ९०.२९ ( कोशल में विष्णु का महोदय नाम से वास ), द्र. कोसल।koshala

 

कोशला पद्म ६.२०९+ ( कोशला तीर्थ के प्रसाद से मुकुन्द ब्राह्मण को उत्तम गति की प्राप्ति की कथा ), वायु ७७.३६ ( कोशला में मतङ्ग नामक वापी में स्नान मात्र से कामचारी पक्षियों के स्वर्ग गमन का उल्लेख ), कथासरित् १२.४.६७, १२.४.२०२ ( कोशला नगरी वासी कमलाकर नामक राजपुत्र की कथा ) । koshalaa

 

कोशस्तेन लक्ष्मीनारायण ३.११३ ( ब्रह्मा के जघन प्रदेश से कोशस्तेन की उत्पत्ति, कोशस्तेन राक्षस द्वारा द्विजों के भक्षण से देवों को सत्त्वहीनता रूप त्रास, श्रीहरि द्वारा कोशस्तेन के निवासस्थान तथा मर्यादा को निश्चित करने का वर्णन ) ।

 

कोशाम्बी नारद १.११.५९ ( कौशाम्बी नगरी वासी सुघोष का भद्रमति को भूमि दान, भद्रमति द्वारा विष्णुदत्त को भूदान, भूदान फल का वर्णन ), स्कन्द ३.१.५.३४ ( ब्रह्मा के शाप से विधूम नामक वसु का पृथ्वी पर कौशाम्बी नगर के राजा शतानीक के पुत्र रूप में उत्पन्न होने का वृत्तान्त ), कथासरित् १.१.६४ ( पार्वती के शापवश पुष्पदन्त नामक गण के कौशाम्बी नगरी में वररुचि रूप से उत्पन्न होने का उल्लेख ), २.१.५ ( वत्स देश के मध्य भाग में भूकर्णिका सदृश कौशाम्बी नगरी की स्थिति का उल्लेख ), द्र. कौशाम्बी । koshambi/koshambee

 

कोशीतिका ब्रह्माण्ड १.२.३३.१९ ( ब्रह्मवादिनी लोपामुद्रा का उपनाम ) ।

 

कोष अग्नि २५५.२८,४७ ( सन्दिग्ध अर्थ के निर्णय हेतु धर्मशास्त्र में वर्णित पांच दिव्य प्रमाणों में से एक, कोष दिव्य प्रमाण द्वारा सत्यानृत की परीक्षा विधि का कथन ), लक्ष्मीनारायण ३.१९२.१( धनिष्ठ कोष : धनिष्ठकोष नामक श्रेष्ठी की गणिकाओं में आसक्ति, श्रेष्ठी की पत्नी स्नेहलता द्वारा भगवद् भक्ति तथा व्रत आराधना आदि से धनिष्ठकोष को गणिकाओं से मुक्त करने का वृत्तान्त ) । kosha

 

कोष्ठक लक्ष्मीनारायण २.२१७.१०४ ( श्रीहरि के कोष्ठक ऋषि के साथ पेयिस्था नगरी में गमन का उल्लेख ) ।

 

कोसल भागवत १०.७५.१२ ( युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के पश्चात् यज्ञान्त स्नान हेतु युधिष्ठिर को आगे करके यदु, काम्बोज, कुरु, केकय तथा कोसल देश के नरपतियों का सैन्य सहित गङ्गा की ओर गमन का उल्लेख ), १०.८६.२० ( कृष्ण के मिथिला जाते समय कोसल प्रभृति देशों के निवासियों द्वारा श्रीकृष्ण के मुखारविन्द के रसपान का उल्लेख ), विष्णु ४.४.१०३ ( राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के स्वर्गारूढ होने पर उनमें अनुराग रखने वाले कोसल नगर के निवासियों को भी सालोक्यता प्राप्ति का उल्लेख ), विष्णुधर्मोत्तर १.१२ ( भारत की पूर्व दिशा में स्थित कोसल नगरी के वैभव का वर्णन ), महाभारत कर्ण ४५.३४( कोसल निवासियों की प्रेक्षितज्ञ विशेषता का उल्लेख ), योगवासिष्ठ ३.३७.४३ ( विदूरथ और सिन्धुराज के सैन्य युद्ध में कोसल देश की सेना के पौरव देश की सेना से युद्ध का उल्लेख ), वा.रामायण १.१३.२६ ( कोसल देश के राजा भानुमान् को दशरथ के अश्वमेध यज्ञ में आमन्त्रित करने का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण १.१२३ ( सरयू तट पर स्थित कोसल वन की वृक्ष सम्पदा तथा ऐश्वर्यादि का वर्णन ) । kosala

 

कोहनस्व स्कन्द ५.३.१२२ ( कोहनस्व तीर्थ का नाम हेतु तथा माहात्म्य : ब्राह्मण द्वारा शिव उपासना  से यमकिङ्करों से मुक्ति की कथा ) ।

 

कोहल पद्म ६.१९६.१८ ( तुङ्गभद्रा नदी के तट पर स्थित कोहल नगरवासी आत्मदेव ब्राह्मण को विष्णु कथा रस पान से हरिपद प्राप्ति की कथा ), ब्रह्माण्ड १.२.३५.४८ ( सामवेद शाखा प्रवर्तक लाङ्गल के ६ शिष्यों में से एक ), स्कन्द २.७.१७.४८ ( मतङ्ग मुनि के पुत्र कोहल का शाप से मत्त मातङ्ग बनना, वैशाख धर्म श्रवण से मुक्ति प्राप्ति का कथन ) । kohala

 

कोह्लार गणेश १.७.८ ( कोह्लार नगर में चिद्रूप वैश्य व उसके दुष्ट पुत्र कामन्द का वृत्तान्त ) ।

 

कौच्छे स्कन्द ५.३.४८.६८ ( अन्धक से युद्ध में शिव द्वारा अन्धकासुर पर कौच्छे नामक अस्त्र के प्रयोग का उल्लेख ) ।

 

कौटिल्य ब्रह्माण्ड २.३.७४.१४४ ( कौटिल्य द्वारा महापद्म वंशीय राजाओं को अपदस्थ कर चन्द्रगुप्त को सिंहासनारूढ करने का उल्लेख ), मत्स्य २७२.२२ ( कौटिल्य द्वारा महापद्म के पुत्रों का उच्छेदन कर  मौर्यों को सिंहासनारूढ कराने का उल्लेख ), वायु ९९.३३० ( कौटिल्य द्वारा महापद्म वंशीय राजा को अपदस्थ करके चन्द्रगुप्त को राज्य पर अधिष्ठित करने का उल्लेख ), विष्णु ४.२४.२६ ( कौटिल्य ब्राह्मण द्वारा नन्दवंशीय राजाओं का उन्मूलन करने पर सौर्य राजाओं द्वारा शासन करने का उल्लेख ) ;, द्र. चाणक्य । kautilya

 

कौण्डिन्य गणेश १.१९.६ ( कौडिन्य नगर में राजा भीम की कथा ), १.२१.२१ ( कौण्डिन्य पुर में आने पर कमला - पुत्र दक्ष का रोगमुक्त होना ), १.२५.१ ( कौण्डिन्य नगर में चन्द्रसेन राजा की मृत्यु के पश्चात् का वृत्तान्त ), १.६३.८ ( कौण्डिन्य द्वारा स्वपत्नी आश्रया को दूर्वांकुर माहात्म्य का वर्णन ), १.६६.२७ ( कौण्डिन्य द्वारा स्वपत्नी को एक दूर्वाङ्कुर भार के बराबर स्वर्ण मांगने इन्द्र के पास भेजने की कथा ), नारद २.२७.५१+ ( कौण्डिन्य ब्राह्मण की पत्नी को पतिवंचना से काष्ठीला / काष्ठकीट योनि की प्राप्ति, काष्ठीला द्वारा रानी सन्ध्यावली से विस्तारपूर्वक पूर्वजन्म के वृत्तान्त का कथन ), पद्म ६.४९.२९ ( कौण्डिन्य मुनि द्वारा निर्दिष्ट वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में करणीय मोहिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से धृष्टबुद्धि के पापों का क्षय तथा वैष्णव लोक की प्राप्ति का कथन ), ६.६६.१९ ( कौण्डिन्य ग्राम में भीमक - पुत्र मुद्गल मुनि के वास का उल्लेख ), ६.१४५.२ ( कौण्डिन्य मुनि के आश्रम के हस्तिमती नदी के जल में बह जाने से मुनि द्वारा नदी को शुष्कता का शाप ), भविष्य ४.९४.४४ ( अनन्त चर्तुदशी व्रत माहात्म्य के अन्तर्गत कौण्डिन्य नामक द्विज को अनन्त भगवान के दर्शन की लालसा, दर्शन तथा अनन्त भगवान् की कृपा से नक्षत्र रूप होने की कथा ), स्कन्द १.१.१८.७९ ( कर्म विपाक से ३ घडी के लिए इन्द्रपद प्राप्त करने पर कितव द्वारा विभिन्न ऋषियों को दिए गए विभिन्न दानों में कौण्डिन्य ऋषि को कल्पतरु व गृह प्रदान का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण १.२४९.८० ( कौण्डिन्य ऋषि द्वारा उपदिष्ट वैशाख - शुक्ल - मोहिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से धृष्टबुद्धि नामक पापी वैश्य के पापों का क्षय तथा वैष्णव लोक की प्राप्ति का वर्णन ) । kaundinya

 

कौतुकपुर कथासरित् ९.४.१६७ ( कौतुकपुर नगर - निवासी अर्थवर्मा और भोगवर्मा नामक वैश्यों की  कथा के माध्यम से धन - लक्ष्मी की तुलना में भोग - लक्ष्मी की श्रेष्ठता का कथन ) ; द्र. विज्ञप्तिकौतुक ।

 

कौतुजाति मत्स्य २०१.३४ ( पराशरवंशीय पांच नील पराशरों में से एक ) ।

 

कौत्स मत्स्य १९५.२५ ( भृगु के गोत्र प्रवर्तकों में से एक ), १९६.३३ ( एक त्रिप्रवर ऋषि ), स्कन्द २.८.४.५४ ( कौत्स मुनि द्वारा इक्ष्वाकुवंशीय राजा रघु से दक्षिणा रूप में १४ कोटि सुवर्णों की प्राप्ति तथा मुनि द्वारा रघु को सत्पुत्र प्राप्ति रूप वर प्रदान करना ), २.८.५.११ ( कौत्स मुनि द्वारा राजा रघु से १४ कोटि सुवर्ण मुद्राओं के मांगने के हेतु का कथन ) । kautsa

 

कौथुम ब्रह्माण्ड १.२.३५.४५ ( पराशर - पुत्र, एक साम संहिता के आचार्य ), भविष्य १.२११ ( कौथुमि : हिरण्यनाभ - पुत्र कौथुमि को ब्रह्महत्या से कुष्ठ प्राप्ति, सूर्य उपासना से कुष्ठ से मुक्ति का वर्णन ), स्कन्द १.२.५.५४ ( मातृका विषयक नारद के प्रश्न के उत्तर में सुतनु ब्राह्मण द्वारा कौथुम ब्राह्मण के पुत्र के मातृका - ज्ञान के वृत्तान्त का वर्णन ), ६.१८०.३६ ( ब्रह्मा के यज्ञ में कौथुम के प्रस्तोता बनने का उल्लेख ) । kauthuma

 

कौन्तलपुर गर्ग १०.५१.४० ( अनिरुद्ध के अश्वमेधीय अश्व का राजा चन्द्रहास के कौन्तलक नामक नगर में पहुंचने का उल्लेख ) ।

 

कौपीन गरुड २.३०.५५/२.४०.५५( मृतक की कौपीन में त्रपु देने का उल्लेख )

 

कौबेरक वायु ४७.६० ( कौबेरक ऋषि के हरिशृङ्ग में वास का उल्लेख ) ।

 

कौमार ब्रह्माण्ड १.२.१४.१८ ( शाकद्वीप में हव्य - पुत्र कुमार के नाम पर कौमार वर्ष के नामकरण का उल्लेख ), १.२.१९.९२ ( रैवत पर्वत के सन्निकट शाकद्वीप का एक राज्य ), भागवत १.३.६ ( प्रथम सर्ग में हरि द्वारा कौमार रूप में अवतार ग्रहण का उल्लेख ), मत्स्य १२२.२२ (शाक द्वीप के सात दिव्य महापर्वतों में से एक नारद पर्वत के वर्ष का कौमार नाम से उल्लेख ), वायु ३३.१७ (शाक  द्वीप में हव्यवाहन के पुत्र कुमार के नाम पर कौमार वर्ष के नामकरण का उल्लेख ), ४९.८६ ( रैवत पर्वत के सन्निकट शाक द्वीप का एक राज्य ), विष्णु १.५.२५ ( प्रजापति के नौ सर्गों में से नवां सर्ग ) । kaumaara

 
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