Puraanic contexts of words like Kumuda, Kumbha/pitcher, Kumbhaka etc. are given here.


Comments on Kumuda

Remarks on Kumbha

Vedic contexts on Kumbha


कुमुञ्ज वायु ३६.१८ ( मन्दर के पूर्व में स्थित तथा सिद्धों के आवास से युक्त अनेक पर्वतों में कुमुञ्ज का उल्लेख ), ३७.१ ( शीतान्त और कुमुञ्ज पर्वतों के मध्य स्थित द्रोणी / घाटी में श्रीसर सरोवर का उल्लेख ), ३९.२८ ( कुमुञ्ज पर्वत के धातु - चित्रित शिखरों पर दानवों के आठ नगरों की स्थिति का उल्लेख ) । kumunja

 

कुमुथि वायु १०६.२४ ( गयासुर के शरीर पर सम्पन्न ब्रह्मा के यज्ञ के अनेक मानस पुरोहितों में से एक )

 

कुमुद अग्नि ५६.१३ ( आठ ध्वज - देवताओं में से एक ), ९६.१० ( आठ ध्वज - देवताओं में से एक कुमुद के पूजन सम्बन्धी मन्त्र का उल्लेख ), २०७ ( कौमुद व्रत का वर्णन ), गरुड ३.२४.७८(श्रीनिवास के उत्तर द्वार पर कुमुद कुमुदाक्ष की स्थिति),  गर्ग ५.२.१८ ( इन्द्र के अनुचर कुमुद द्वारा अश्वमेध के अश्व की चोरी करने पर इन्द्र के शाप से अश्वाकृति केशी असुर बनने का उल्लेख ), देवीभागवत ८.६.१८ ( सुमेरु पर्वत के एक स्तम्भ कुमुद पर्वत पर शतबल नामक वट वृक्ष की स्थिति का उल्लेख .), नारद १.६८.३७ ( कुमुद की समिधा से मन्त्रियों को वश में करने का उल्लेख ), १.९०.७०( कुमुद द्वारा देवी पूजा से चर सिद्धि का उल्लेख ), पद्म ६.१२२.६२ ( कुमुद शब्द की निरुक्ति, बलि पूजा में कुमुद पुष्पों के अर्पण से कौमुदी उत्सव के कौमुदी नाम धारण करने का कथन ), ६.१३३.३० ( कुमुद पर्वत पर सत्यवादन तीर्थ की स्थिति का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड १.२.१९.४४( कुमुद पर्वत के श्वेत वर्ष का उल्लेख), २.३.७.२४२ ( राम - रावण युद्ध का एक वानर योद्धा ), २.३.७.२९२ ( इरावती के चार पुत्रों में से एक ), २.३.७.३४५ ( चन्द्रसाम हस्ती द्वारा पिङ्गला हस्तिनी से कुमुद नामक पुत्र की उत्पत्ति ), भविष्य ३.४.१७.५२ ( ८ दिग्गजों में से एक ), ४.१८०.२९ ( वही), भागवत ५.१६.११, २४ ( कुमुद पर्वत पर शतवल्श नामक वट वृक्ष की स्थिति का उल्लेख ), ७.८.३९ ( विष्णु - पार्षदों में कुमुद का उल्लेख ), ८.२१.१६ ( विष्णु - पार्षद, विष्णु पार्षदों द्वारा असुर सेना पर आक्रमण का उल्लेख ), ११.२७.२८ ( नन्द, सुनन्द, कुमुद आदि आठ पार्षदों की आठ दिशाओं में स्थापना करके पूजन का उल्लेख ), १२.७.३( अथर्ववेदाचार्य पथ्य के तीन शिष्यों में से एक ), मत्स्य २०.१८ ( कौशिक के सात पुत्रों का मानसरोवर में चक्रवाक योनि में जन्म लेने पर सुमना, कुमुद, शुद्ध, आदि नाम धारण करने का उल्लेख ), १२२.५२ ( कुशद्वीप का एक पर्वत, अन्य नाम विद्रुमोच्चय ), १२३.३ ( गोमेदक द्वीप का सर्वौषधि समन्वित एक पर्वत ), १३३.१० ( दानवों द्वारा कुमुद , अञ्जन आदि दिग्गजों के अपहरण का उल्लेख ), मार्कण्डेय ७५.२२  ( महर्षि ऋतवाक् द्वारा शाप से कुमुद पर्वत पर रेवती को गिराना, रेवती नक्षत्र के पतन से कुमुद की रैवतक नाम से प्रसिद्धि ), लिङ्ग १.४९.६३ ( कुमुद वन में विष्णु -प्रमुख देवों के वास का उल्लेख ), १.५०.१२ ( कुमुद पर्वत पर किन्नरों के वास का उल्लेख ), वराह ७८.१८ ( कैलास के उत्तरस्थ पर्वतों में से एक ), १२६.२८ ( कुब्जाम्रक तीर्थ क्षेत्र में स्थित कुमुदाकार तीर्थ में स्नान मात्र से स्वर्ग प्राप्ति का उल्लेख ), वामन ५७.७३ ( यक्षों द्वारा कुमार को प्रदत्त १५ गणों में से एक ), वायु ३६.२८ ( शीतोद नामक सरोवर के पश्चिम में स्थित पर्वतों में से एक ), ३८.४५ ( कुमुद व अञ्जनाचल पर्वतों के मध्य केसरद्रोणी की स्थिति का उल्लेख ), ३९.५९ ( कुमुद पर्वत पर किन्नरों के आवास का उल्लेख ), ४१.१० ( कुबेर की पद्म, महापद्म आदि आठ निधियों में से एक ), वायु ४७.२(कैलास के पाद से कुमुदों के मन्द नामक जल से मन्दाकिनी नदी की उत्पत्ति का उल्लेख),  ४८.३४ ( कुमुद द्वीप में महादेव - भगिनी कुमुदा के दर्शन से चित्त - दोषों के नष्ट होने का उल्लेख ), ४९.३२ ( शाल्मलि द्वीप के सात पर्वतों में से एक ), ६९.१६० ( मणिवर व देवजननी के अनेक पुत्रों में से एक ), ९६.२४७ ( सुनथ व बृहती के तीन पुत्रों में से एक ), विष्णुधर्मोत्तर १.२४८.३१ ( गरुड के पुत्रों में से एक ), शिव २.४.११.२१( प्रलम्बासुर से पीडित शेष - पुत्र कुमुद का कुमार की शरण में जाना, प्रलम्ब वध से कुमुद को अभय प्राप्ति ), स्कन्द १.२.३६.११( शेषनाग - पुत्र कुमुद द्वारा प्रलम्ब दैत्य के पाताल में आगमन को सूचित करने का उल्लेख ), ३.१.४४.३४(कुमुद द्वारा अकम्पन का वध), ३.१.४९.३२ (कुमुद वानर द्वारा रामेश्वर की स्तुति ), ५.३.१९८.८८ ( कुमुद तीर्थ में उमा की सत्यवादिनी नाम से स्थिति का उल्लेख ), ७.२.१७.१०१ ( कुमुद पर्वत पर हरि व हर की उपस्थिति, रेवती नक्षत्र के पतन से कुमुद का रैवतक पर्वत बनना, ऋतवाक् मुनि की कथा ), हरिवंश २.७९.५२ ( कौमुदी : कौमुदी / कार्तिक पूर्णिमा को सुवर्णसूत्र दान का निर्देश ), महाभारत ११५.५४( कौमुद/शरद ऋतु में मधु मांस का वर्जन ), योगवासिष्ठ ३.३९.९ ( कुमुद पुष्पों की तारागणों से उपमा ), वा.रामायण ६.२६.२७ ( सारण द्वारा रावण को वानर यूथपतियों का परिचय देने के प्रसंग में कुमुद नामक वानर यूथपति का परिचय ), लक्ष्मीनारायण १.१५४.७( मेरु शृङ्ग पर स्थित कुमुद पर्वत पर विष्णु के निवास का कथन ), १.१५४.३२( मन्दर व कुमुद पर्वतों का रैवत पर्वत पर तैजस रूप में स्थित होने का वर्णन ), १.४८४.१६ ( कुमुदा : दक्ष - पुत्री, चन्द्रमा - पत्नी, अमृत - माता कुमुदा द्वारा पातिव्रत्य बल से चन्द्रमा को दैत्यों के बन्धन से मुक्त कराना ), १.१५४.३ ( कुमुद पर्वत के रैवत पर्वत पर स्थित होने का कथन ), २.२७.२७ (कमलों के विकास से सूर्योदय तथा कुमुदों के विकास से चन्द्रोदय का कथन ), २.२८.२३ ( कुमुद जाति के नागों के दास होने का उल्लेख ), ४.२.१० ( राजा बदर के कौमुदक नामक विमान का कथन ), कथासरित् ८.५.५४ ( प्रभास से युद्ध हेतु श्रुतशर्मा द्वारा प्रेषित आठ महारथी विद्याधरों में सातवें कुमुद पर्वत के राजा गर्दभरथ वराहस्वामी का उल्लेख ), १०.२.१ ( कुमुदिका : राजा नरवाहनदत्त को वेश्या चरित्र से अवगत कराने हेतु गोमुख द्वारा विक्रमसिंह व कुमुदिका वेश्या की कथा का वर्णन ) । द्र. कौमुदी, कौमौदकी।  kumuda

Comments on Kumuda

कुमुदद्युति ब्रह्माण्ड २.३.७.३४५ ( चान्द्रमस साम से उत्पन्न दो गजों में से एक, महापद्म व ऊर्मिमाली - पिता ) ।

 

कुमुदमाली वामन ५७.६१ ( शंकर द्वारा सेनापति पद पर  अभिषिक्त गुह को प्रदत्त चार प्रमथों में से एक ) ।

 

कुमुदा गर्ग ४.१९.४० ( यमुना सहस्रनामों में से एक ), देवीभागवत ७.३०.५६ ( मानसरोवर में कुमुदा देवी के वास का उल्लेख ), भागवत १०.२.१२ ( योगमाया के १४ नामों में से एक ), मत्स्य १३.२७ ( मानसरोवर तीर्थ में सती देवी के कुमुदा नाम से विराजित होने का उल्लेख ), वायु ४८.३५ ( कुमुद द्वीप में स्थित महादेव - भगिनी कुमुदा के दर्शन से चित्त दोषों के दूर होने का उल्लेख ), स्कन्द ५.३.१९८.६५ ( मानस तीर्थ में उमा देवी की कुमुदा नाम से स्थिति ), लक्ष्मीनारायण १.४८४.१६ ( दक्ष - कन्या, सोम - पत्नी, अमृत - माता, दैत्यों का अमृत हेतु सोम के समीप आगमन, अमृत प्राप्त न होने पर दैत्यों द्वारा सोम को पृथ्वी पर गिराना, सोम - पत्नी कुमुदा द्वारा पातिव्रत्य बल से दैत्यों को भस्म करना तथा सोम को अम्बर में स्थापित करने का वर्णन ), २.११८.१२ ( सन्तारण ब्राह्मण की कन्या कुमुदा द्वारा हरि अर्चन हेतु नित्य गोदोहन करके दुग्ध प्रदान करने का उल्लेख ), ४.१०१.११८ ( श्रीकृष्णनारायण -पत्नी, प्रमोदिनी व प्रमोदकृत् - माता ) । kumudaa

 

कुमुदाक्ष अग्नि ५६.१३ ( आठ ध्वज देवताओं में से एक ), ९६.१० ( आठ ध्वज देवताओं में से एक कुमुदाक्ष के पूजन सम्बन्धी मन्त्र का उल्लेख ), गरुड ३.२४.७८(श्रीनिवास के उत्तर दिशा में कुमुदाक्ष-कुमुदन्त द्वारपालों का उल्लेख),  ब्रह्माण्ड २.३.७.१२९ ( देवजनी व मणिवर के अनेक यक्ष पुत्रों में से एक ), भागवत ८.२१.१६ ( विष्णु - पार्षदों में से एक ), लक्ष्मीनारायण २.२४३.३० ( कुमुदाक्षी : हेमकलिङ्ग नृप तथा नृपपत्नी कुमुदाक्षी की हरिभक्ति का वर्णन ) । kumudaaksha

 

कुमुदादि ब्रह्माण्ड १.२.३५.५९ ( अथर्ववेद शाखा प्रवर्तक पथ्य की शिष्य परम्परा का एक ऋषि ), वायु ६१.५२ ( पथ्य के तीन शिष्यों में से एक ), विष्णु ३.६.११ ( पथ्य के तीन शिष्यों में से एक ) ।

 

कुमुदाभ वायु ४४.१२ ( केतुमाल देश का एक जनपद ) ।

 

कुमुदिनी ब्रह्माण्ड ३.४.१२.१३ ( भण्ड की चार रानियों में से एक ), योगवासिष्ठ ३.१५.२० ( कुमुदिनी पुष्प से कान्ता की तुलना ), कथासरित् १२.६.१५० ( राजा भूनन्दन का दैत्य - कन्या कुमुदिनी के समीप पहुंचना, पुन: विलग होना, मुनि के आदेश से बारह वर्ष के तप के पश्चात् भूनन्दन द्वारा कुमुदिनी को प्राप्त करने का वृत्तान्त ) । kumudini

 

कुमुद्वती ब्रह्माण्ड १.२.१६.३३ ( विन्ध्य पाद से नि:सृत अनेक नदियों में से एक ), १.२.१९.७५ ( क्रौंच द्वीप की सात प्रधान नदियों में से एक ), मत्स्य ११४.२७ ( विन्ध्याचल की उपत्यकाओं से नि:सृत नदियों में से एक ), १२२.८८ ( क्रौंच द्वीप की सात नदियों में से एक ), वायु ४७.२ ( कुमुद्वान् सरोवर से दिव्य मन्दाकिनी नदी के उद्गम का उल्लेख ), ४९.६९ ( विन्ध्याचल की उपत्यकाओं से नि:सृत नदियों में से एक ), विष्णु २.४.५५( क्रौंचद्वीप की सात प्रधान नदियों में से एक ), स्कन्द ३.३.४.१० ( राजा विमर्दन का स्वपत्नी कुमुद्वती से शिव माहात्म्य का वर्णन : कुमुद्वती का पूर्व जन्म में कपोती होना, शिवमन्दिर में मरण से राजमहिषी बनना ), ५.१.४५ ( श्राद्ध हेतु कुमुद्वती नगरी की प्रशस्तता तथा प्रभाव का वर्णन ), ५.१.५९.२ ( कुमुद्वती में गया तीर्थ की स्थिति का उल्लेख ), ५.१.६३(वामन कुण्ड की महिमा, वामन कुण्ड की कुमुद्वती/अवन्ती में स्थिति, वामन - बलि की कथा),  ५.१.७०.३० ( कुमुद्वती में ४ नदियों, ८४ ईश्वरों आदि की स्थिति का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण १.२६४.५१ ( पुण्डरीक नृप की पत्नी कुमुद्वती  के धामदा एकादशी व्रत के प्रभाव से ब्रह्मधाम गमन का वर्णन ), कथासरित् ८.२.३२६ ( कुमुदावती : पञ्चम रसातल के असुरराज दुरारोह द्वारा कुमुदावती को सूर्यप्रभ को प्रदान करने का उल्लेख ) । kumudvati

 

कुम्भ अग्नि ५६.१६ ( कुम्भ स्थापना विधि ), ५७ ( कुम्भ अधिवासन विधि का वर्णन ), ९६.२४ ( प्रतिष्ठा कर्म में कुम्भ स्थापना विधि का कथन ), १२६.४ ( कुम्भ चक्र में नक्षत्र न्यास से फल का विचार ), गरुड २.२७.५२ ( प्रेतत्व निवृत्ति  हेतु उदक घट दान तथा दुग्धघृत घट दान का कथन ), पद्म १.३४.२७७( मण्डल में विभिन्न दिशाओं में विन्यस्त ८ कुम्भों के जलों से स्नान के विशिष्ट फलों का कथन ), ब्रह्माण्ड २.३.७.१४४ ( कुम्भ नामक दैत्य  द्वारा कापिलेय नामक दैत्य राक्षसों की उत्पत्ति का उल्लेख ), भागवत ९.१०.१८ ( वानरसेना द्वारा लङ्का के ध्वस्त किए जाने पर रावण द्वारा कुम्भ, निकुम्भ आदि अपने अनुचरों को युद्धार्थ भेजने का उल्लेख ), मत्स्य १४८.९६ (अश्विनीकुमारों की ध्वजाओं पर कुम्भ आकृति के अंकित होने का उल्लेख ), २६९.३७ ( कुम्भ नामक प्रासाद के आकृति में कुम्भ की भांति तथा ऊंचाई में नौ खण्ड वाले होने का उल्लेख ), योगवासिष्ठ ६.१.१०५.९ ( दुर्वासा द्वारा कुम्भ को रात्रि में स्त्री होने का शाप ), ६.१.१०६.३६(कुम्भ रूप धारी चूडाला का मदनिका नाम से शिखिध्वज की पत्नी बनना ), वायु २३.२११ ( २५वें द्वापर में विष्णु के अवतार मुण्डीश्वर के ४ पुत्रों में से एक ), ६९.१७६/ २.८.१७० ( कुम्भ नामक दैत्यराज से कापिलेय नामक दैत्यों की उत्पत्ति का उल्लेख ), ७७.४७ ( कुम्भ तीर्थ में किए गए श्राद्ध के अक्षय फलदायी होने का उल्लेख ), विष्णु ४ .६.१४ ( तारकामय युद्ध में जम्भ, कुम्भ आदि दैत्यों द्वारा सोम की सहायता का उल्लेख ), विष्णुधर्मोत्तर १.२२२.१८( रावण द्वारा शिव के शातकुम्भमय लिङ्ग की पूजा का उल्लेख ), स्कन्द १.२.६२.२६( आपकुम्भ : क्षेत्रपालों के ६४ प्रकारों में से एक ), ५.३.२०.७६ ( ४ कुम्भों का ४ समुद्रों से तादात्म्य ), ५.३.१०३.१९० ( पुत्र प्राप्ति हेतु ऐरण्डी - नर्मदा संगम पर औषधि, चन्दन आदि मिश्रित जलकुम्भ से दम्पत्ति के अभिषेक का कथन ), स्कन्द १.१.१३.२८( बलि - सेनानी, वरुण से युद्ध का उल्लेख ), ५.३.१६८.१७ ( कुम्भकर्ण के दो पुत्रों में से एक, अङ्कूर - पिता ), हरिवंश २.८८.२९ ( श्रीकृष्ण - पत्नियों के स्तनों की कुम्भों से उपमा ), महाभारत वन ७५.१२( बाहुक रूप धारी नल द्वारा दर्शन से खाली कुम्भों के पूर्ण हो जाने का उल्लेख ), अनुशासन १११.१०१( पिष्टमय पूप के हरण से कुम्भोलूक योनि प्राप्ति का उल्लेख ), वा.रामायण ६.५९.२० ( विभीषण द्वारा राम को रावण के कुम्भ आदि वीर योद्धाओं का परिचय देना ), ६.७६.८१ ( कुम्भकर्ण - पुत्र, सुग्रीव के साथ युद्ध करते हुए कुम्भ की मृत्यु का वर्णन ) ; द्र. निकुम्भ, वेदकुम्भ ।

Remarks on Kumbha

Vedic contexts on Kumbha

 

 

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