Puraanic contexts of words like Krauncha, Kshatriya/warrior, Kshamaa/pardon etc. are given here.

क्रौञ्चव्यूह गर्ग १०.४९.६ (यादवों के साथ युद्ध में कौरवों का स्वरक्षार्थ क्रौञ्चव्यूह का निर्माण, क्रौञ्चव्यूह के मुख पर भीष्म, कण्ठ पर द्रोण, पक्षों पर कर्ण तथा शकुनि, पुच्छ पर दुर्योधन तथा मध्य में चतुरंगिणी सेना की स्थापना का कथन ), पद्म ५.२५.३१( राजा सुबाहु की आज्ञा से क्रौञ्चव्यूह का निर्माण, क्रौञ्चव्यूह के मुख पर सुकेतु, गले पर चित्रांग, पक्षों पर राजपुत्रों, पुच्छ पर स्वयं राजा तथा मध्य में चतुरंगिणी सेना की स्थापना का कथन ) । kraunchavyuuha

 

क्रौञ्ची पद्म ७.८.५२ ( गङ्गा महिमा से क्रौञ्ची पक्षी का शक्र - दासी पद्मगन्धा बनने का वृत्तान्त ), ब्रह्माण्ड २.३.७.४४६, ४४८ ( ताम्रा की ६ पुत्रियों में से एक, गरुड - भार्या ), वायु ६९.३२५, ३२८, ३३६ ( पुलह - पुत्री ताम्रा से क्रौञ्ची की उत्पत्ति, गरुड - भार्या, क्रौञ्ची से वार्धीणस् नामक पक्षियों की उत्पत्ति का उल्लेख ), ६९.३४२ ( कश्यप - पत्नी क्रौञ्ची के श्रुतिशालिनी होने का उल्लेख ), kraunchee/ kraunchi

 

क्लम विष्णु २.४.११ ( प्लक्ष द्वीप की सात मुख्य नदियों में से एक ) ।

 

क्लिन्ना नारद १.६६.९५( मातृका न्यास के संदर्भ में विश्वमूर्ति विष्णु की शक्ति क्लिन्ना का उल्लेख ) ।

 

क्लीं देवीभागवत ३.१७.३४ ( क्लीं बीज मन्त्र की महिमा, सुदर्शन राजकुमार द्वारा वैभव प्राप्ति की कथा ) ।

 

क्लीब भविष्य ३.४.१५.५५ ( वज्रमय वीर्य तथा दृढ ब्रह्मचर्य से सम्पन्न व्यक्ति की क्लीब संज्ञा का उल्लेख ), स्कन्द ५.३.१५९.१६ ( विप्र को पर्युषित अन्न दान से क्लीबता प्राप्ति का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड ३.४.२७.३८ ( क्लीबा : जयविघ्न महामन्त्र के आठ कोणों की अष्ट देवियों में से एक देवी ) । kleeba

 

क्लेदन नारद १.६६.९५( मातृका न्यास के संदर्भ में भूधर विष्णु की शक्ति क्लेदिनी का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण २.५.३२ ( क्लेदन आदि राक्षसों द्वारा बालप्रभु को मारने का उद्योग, षष्ठी देवी द्वारा बालक की रक्षा ) ।

 

क्लेश भविष्य १.५३.२० ( सूर्य - रथ का वर्णन करते हुए रथ के छत्रदण्ड अथवा छत्र का क्लेश नामोल्लेख ) ।

 

क्वण भागवत १०.२१.१२(कृष्ण की वेणु के क्वणित गीत का उल्लेख), विष्णुधर्मोत्तर ३.१९.१(अवनद्ध वाद्य के क्वणित व करुणान्वित स्वरों का उल्लेख), kwana/kvana

Comments on Kvana

 

क्षण विष्णु ४.२२.२( बृहत्क्षण : बृहद्बल - पुत्र, उरुक्षय - पिता, इक्ष्वाकु वंश के भविष्य के नृपों में से एक )

 

क्षत्र अग्नि ३४८.१२ ( क्षत्र हेतु क्ष: एकाक्षर के प्रयोग का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड १.२.११.३४ ( काम्या व प्रियव्रत के पुत्रों से क्षत्र धर्म के प्रवर्तन का उल्लेख ), मत्स्य ४५.२५ ( अनमित्र व पृथ्वी के तीन पुत्रों में से एक, अनमित्र वंश ), महाभारत शान्ति १४२.२६(अज, अश्व व क्षत्र में सादृश्य होने का उल्लेख), आश्वमेधिक २९.१७ ( क्षत्रियों के वधोपरान्त द्विजों द्वारा उत्पादित क्षत्रियों के भी परशुराम द्वारा कर्तित किए जाने का उल्लेख ), वायु २६.३५ ( रक्तवर्णीय ईकार से क्षत्र कुल के प्रवर्तन का उल्लेख ), २८.२९ ( काम्या व प्रियव्रत के पुत्रों से क्षत्र धर्म के प्रवर्तन का उल्लेख ) ; द्र. बृहत्क्षद्वा । kshatra

 

क्षत्रजित् वायु ६७.८० ( कालनेमि के चार पुत्रों में से एक ) ।

 

क्षत्रधर्म ब्रह्माण्ड २.३.६८.७ ( अनेना - पुत्र, प्रतिपक्ष - पिता ), वायु ९३.७ ( प्रतिपक्ष - पिता, चन्द्रवंश ), विष्णु ४.९.२७ ( संकृति - पुत्र, क्षत्रवृद्ध वंश ),

 

क्षत्रनारायण लक्ष्मीनारायण ३.२४.८० ( मयूर असुर के वध के पश्चात् वैष्णवी प्रजा के रक्षण हेतु कृष्ण का एक अवतार ) ।

 

क्षत्रविद्ध ब्रह्माण्ड ३.४.१.१०४ ( १२ वें मन्वन्तर में रौच्य मनु के दस पुत्रों में से एक )

 

क्षत्रवृद्ध ब्रह्माण्ड २.३.६७.२ (आयु तथा प्रभा के पांच पुत्रों में से एक, सुनहोत्र - पिता ), भागवत ९.१७.१ ( आयु तथा प्रभा - पुत्र, क्षत्रवृद्ध वंश का वर्णन ), विष्णु ४.८.३ ( आयु के ५ पुत्रों में से एक, सुहोत्र - पिता, पुरूरवा वंश ), ४.९.२५ ( प्रतिक्षत्र - पिता ), शिव ५.३४.६२ ( रौच्य मनु के पुत्रों में से एक ), हरिवंश १.२९.६ ( सुनहोत्र - पिता, क्षत्रवृद्ध वंश का वर्णन ) । kshatravriddha

 

क्षत्रसिंह भविष्य ३.२.२२ ( वेताल का ही पूर्व जन्म में बिल्वती ग्राम का राजा क्षत्रसिंह होना, अष्टक प्रभाव से राजा क्षत्रसिंह को वेतालत्व की प्राप्ति का वर्णन ) ।

 

क्षत्रिय गरुड २.४८.७(क्षत्रिय द्वारा ललाट देश से रुधिर पान का उल्लेख), ३.२२.८०(क्षत्रिय में जनार्दन की स्थिति का उल्लेख), ब्रह्माण्ड १.२.५.१०८ ( ब्रह्मा के वक्षस्थल से क्षत्रिय की उत्पत्ति का उल्लेख ), १.२.७.१५४, १६१, १६६ ( क्षत्रिय कर्म का निरूपण ), ब्रह्मवैवर्त्त १.१०.१५ ( चन्द्र, सूर्य और मनु द्वारा उत्पन्न क्षत्रिय गण के श्रेष्ठ होने तथा अन्य क्षत्रिय जाति के ब्रह्मा के बाहु से उत्पन्न होने का उल्लेख ), भागवत १०.२४.२०  ( राजन्य / क्षत्रिय द्वारा पृथ्वी पालन से निर्वाह का निर्देश ), ११.१७.१७( क्षत्रिय वर्ण के स्वभावों का उल्लेख ), मत्स्य १३.६३ ( देवी के १०८ नामों के जप से ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय तथा शूद्र द्वारा मनोवांछित सिद्धि प्राप्त करने का उल्लेख ), १५.१७ ( क्षत्रिय के हविष्मन्त पितृगण होने का उल्लेख ), ३०.१९ ( ययाति के प्रति देवयानी की उक्ति के अनुसार क्षत्रिय और ब्राह्मण में वैवाहिक सम्बन्ध की सम्भावना ), महाभारत आदि ३.१२३ ( ब्राह्मण व क्षत्रिय की भिन्नता प्रदर्शित करते हुए ब्राह्मण का हृदय नवनीत सदृश तथा वाणी क्षुरधार सदृश बतलाते हुए क्षत्रिय का हृदय क्षुरधार सदृश तथा वाणी नवनीत सदृश होने का उल्लेख ), वन १९४ ( क्षत्रिय नरेशों के माहात्म्य के प्रतिपादन में सुहोत्र व शिबि की प्रशंसा ), ३१३.५१ ( क्षत्रिय के कर्त्तव्य - अकर्त्तव्य का कथन : यक्ष - युधिष्ठिर संवाद ), शान्ति ९१.५ ( वस्त्रों का मल दूर करने वाले रजक के समान चरित्रदोष को दूर करने वाले क्षत्रिय के ही प्रजावर्ग के पिता तथा अधिपति होने का उल्लेख ), वराह १२८.१ ( क्षत्रिय की दीक्षा विधि का कथन ), विष्णु १.६.६ ( ब्रह्मा के वक्ष:स्थल से क्षत्रिय की उत्पति का उल्लेख ), ३.८.२७ ( क्षत्रिय के कर्त्तव्य का निरूपण ), ३.८.३९ ( आपत्ति काल में क्षत्रिय के लिए वैश्य कर्म के भी करणीय होने का उल्लेख  ), शिव ५.२१.१ ( ईश्वर मुख से क्षत्रिय की उत्पत्ति का उल्लेख ), ५.२१.१३ ( क्षत्रिय के ब्राह्मण बनने के लिए अपेक्षित कर्मों का कथन ) । kshatriya

 

क्षत्तृ भागवत १२.१२.८ ( विदुर का नाम ) ।

 

क्षत्रोपक्षत्र विष्णु ४.१४.९ ( अक्रूर के १३ पुत्रों में से एक ) ।

 

क्षपणक गरुड २.२.७४(शय्याहर्ता के क्षपणक बनने का उल्लेख),  महाभारत आदि ३.१२७ ( क्षपणक वेषधारी नागराज तक्षक द्वारा गुरुपत्नी हेतु उत्तंक द्वारा लाए गए कुण्डलों को हरण करने का वर्णन ), कथासरित् ७.५.५९ ( ज्ञानी क्षपणक / भिक्षु द्वारा राजकुमारी को बगुले के छद्म रूप का परिचय तथा उसे मारने के उपाय का कथन ) ।

 

क्षपादेश स्कन्द ४.२.९७.१७४ ( क्षपादेश लिङ्ग का महाज्ञान प्रवर्तक रूप में उल्लेख ) ।

 

क्षम ब्रह्माण्ड १.२.३६.२७ ( स्वारोचिष मनु युग के १२ सुधामा देवों में से एक ) ।

 

क्षमा अग्नि ५०.३७ ( क्षमा देवी की प्रतिमा के लक्षणों का कथन ), देवीभागवत ९.१३.४४ ( कृष्ण के सकाम होने पर राधा द्वारा पुन: पुन: कृष्ण को क्षमा करने का उल्लेख ), १२.६.१५५ ( गायत्री सहस्रनामों में से एक ), नारद १.६५.२७( रवि की १२ कलाओं में से एक ), १.६६.९५( सौरि विष्णु की शक्ति क्षमा का उल्लेख ), १.९१.७२ ( अघोर शिव की तृतीय कला ), पद्म २.१२.८३(क्षमा की मूर्ति का स्वरूप), २.१३.१८ ( क्षमा गुण के स्वरूप का कथन ), ब्रह्मवैवर्त्त १.९.११( दक्ष व प्रसूति - कन्या, चन्द्रमा - पत्नी, सहिष्णु - माता ), २.११.७१(क्षमा गोपी की देह से उत्पन्न लज्जा का विश्व में विभाजन), ब्रह्माण्ड १.२.९.५५ ( दक्ष व प्रसूति - कन्या, पुलह - पत्नी ), १.२.११.३० ( कर्दम, उर्वरीवान् , सहिष्णु, कनकपीठ व पीवरी -माता ), १.२.३२.४९ ( क्षमा नामक गुण के लक्षण का कथन ), २.३.७.९९ ( ब्रह्मधानात्मजा एक ब्रह्मराक्षसी ), ३.४.४४.९१( नारदा आदि ६ शक्ति देवियों में से एक ) , व्रñवैवर्त्त २.१.१०९ ( प्रकृति - कला क्षमा के यम - पत्नी होने तथा क्षमा के बिना समस्त लोक के उन्मत्त व भयंकर होने का उल्लेख ), २.११.४६ ( कृष्ण के सकाम होने पर राधा द्वारा कृष्ण को पुन:- पुन: क्षमा करने का उल्लेख ), २.११.७१ ( क्षमा गोपी के साथ कृष्ण का विहार, लज्जित क्षमा का पृथिवी में प्रवेश ), मत्स्य १४५.४६ ( धर्म के अनेक अङ्गों में से एक क्षमा के लक्षणों का कथन ), महाभारत वन ३१३.८७ ( द्वन्द्व सहने का नाम क्षमा होने का उल्लेख : यक्ष - युधिष्ठिर संवाद ), शान्ति ३२९.१२ ( क्षमा के परम बल होने का उल्लेख ), आश्वमेधिक ९२ दाक्षिणात्य पृ. ६३७५( क्षमा नामक गुण तथा क्षमाशील मनुष्य के श्रेष्ठत्व का कथन ), वायु १०.२७, ३१ ( दक्ष - पुत्री, पुलह - पत्नी ), २८.२५ ( कर्दम, अम्बरीष, सहिष्णु, ऋषिधनाकपीवान् व पीवरी - माता, पुलह प्रजापति की भार्या ), विष्णु १.७.७ ( ब्रह्मा के भृगु आदि ९ मानस पुत्रों में से चतुर्थ पुत्र क्रतु की पत्नी ), १.७.२५ ( दक्ष - पुत्री, पुलह - पत्नी ), विष्णुधर्मोत्तर १.५६.१३ ( विभूति वर्णन में जनार्दन के क्षमाशीलों में विरूपाक्ष होने का उल्लेख ), ३.२६९ (क्षमा गुण का वर्णन ), शिव १.१७.६०( सत्य से क्षमा तक विष्णु के १४ लोकों का कथन, क्षमा लोक का वैकुण्ठ नाम? ), ७.१.१७.२६( पुलह - पत्नी, कर्दम आदि ३ पुत्रों के नाम ), स्कन्द ४.१.२९.१६८ ( गङ्गा सहस्रनामों में से एक ), ५.३.५१.३५ ( क्षमा के आठ पुष्पों में से एक होने तथा क्षमा प्रभृति पुष्पों से देवताओं के तुष्ट होने का उल्लेख ), ५.३.२०९.२ ( क्षमानाथ तीर्थ का संक्षिप्त माहात्म्य ), ६.२७१.१०८( तपस्वियों का रूप क्षमा होने का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण १.२८३.३७ ( क्षमा के माताओं में अनन्यतम होने का उल्लेख ) २.२६२.९ ( क्षमाभृत् : भालदेश के राजा क्षमाभृत् द्वारा भगवद्भक्त भाणवीर्य का बन्धन, भगवत् कृपा से भाणवीर्य का मोचन तथा हरि दर्शन का वृत्तान्त ), ३.२३४.३४ ( निर्मोहनायन साधु द्वारा विखण्डल को क्षमा रूपी शस्त्र की महिमा का कथन ), कथासरित् १२.५.२५९ ( क्षमा पारमिता की कथा के अन्तर्गत शुभनय नामक मुनि के मोक्षदायक क्षमा गुण से युक्त चरित्र का कथन ), kshamaa

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