Puraanic contexts of words like Krodha/anger, Krodhaa, Kroshtaa, Krauncha etc. are given here.

Esoteric aspect of Krauncha

Vedic view of Krauncha

क्रूर ब्रह्माण्ड २.३.७.९३ ( पौरुषेय नामक राक्षस के पांच पुत्रों में से एक ), वायु ६९.३३७/२.८.३३७( कद्रू के क्रूरशीला होने का उल्लेख ), कथासरित् १०.६.१०१ ( क्रूरलोचन : उलूकराज के मन्त्रियों में से एक ) ; द्र. अक्रूर । kruura/kroora/ krura

 

क्रोड अग्नि ३४८.८ (° ° अक्षर के तस्कर तथा क्रोडपुच्छ के अर्थ में प्रयुक्त होने का उल्लेख ), गणेश २.१०६.४ ( गणेश द्वारा क्रोड / सूकर रूप धारी मङ्गल दैत्य का वध ), गरुड १.१२७.१५ ( वराह न्यास के संदर्भ में कटि में क्रोडाकृति के न्यास का निर्देश ), नारद १.५१.५४ ( होम में अभिचार कर्म हेतु क्रोडी मुद्रा का कथन ),योगवासिष्ठ ६.१.४१.४१ ( वात सत्ता, स्पन्दसत्ता, स्पर्शसत्ता आदि का क्रोडीकरण होकर देह का निर्माण होने का कथन ) । kroda

 

क्रोध अग्नि ३४८.२ ( क्रोध अर्थ में °° एकाक्षर के प्रयोग का उल्लेख ), गणेश २.१४.१२ ( महोत्कट गणेश द्वारा खर रूप धारी काम व क्रोध राक्षसों का वध ), नारद १.४३.७२( नित्य क्रोध से श्री की रक्षा का निर्देश ), १.६६.११०( क्रोधीश की शक्ति महाकाली का उल्लेख ), पद्म १.१९.३२६ ( सत्त्व द्वारा क्रोध को धारण करने तथा क्रोध को जीतने वाले के सत्सारतम होने का उल्लेख ), ब्रह्मवैवर्त्त ४.८५.११६ ( क्रोध युक्त मनुष्य के गर्दभ बनने का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड ३.४.१९.७८ ( गीतिरथेन्द्र के षष्ठ पर्व पर आश्रित आठ भैरवों में से एक ), भविष्य ४.९४.६३( अनन्त व्रत कथा में खर रूप ), भागवत ३.१२.२६ (ब्रह्मा की भृकुटियों से क्रोध की उत्पत्ति का उल्लेख ), ४.८.३ ( लोभ और निकृति / शठता से क्रोध व हिंसा की उत्पत्ति का उल्लेख, अधर्म वंश ), मत्स्य ३.१० ( ब्रह्मा के भ्रूमध्य से क्रोध की उत्पत्ति ), १५७.४ ( वीरक को शाप देने के पश्चात् पार्वती के मुख से क्रोध के सिंह रूप में निर्गत होने का उल्लेख ), महाभारत वन ३१३.९१ ( क्रोध के दुर्जय शत्रु होने का उल्लेख : यक्ष - युधिष्ठिर संवाद ), शान्ति ३२९.११ ( तप की क्रोध से रक्षा करने का निर्देश ), आश्वमेधिक ३१.२( ३ राजस गुणों में से एक ), ९२.४२ ( जमदग्नि मुनि की परीक्षा लेने हेतु धर्म का क्रोध रूप धारण कर दुग्ध - पात्र में प्रवेश, क्रोध रूप धारी धर्म की पराजय ), मार्कण्डेय ४७.९/५०.९( ब्रह्मा के क्रोध से अर्धनारी वपु वाले पुरुष की उत्पत्ति का कथन ), वायु १०.४१ ( मृत्यु की चार सन्तानों में से एक ), १०१.२९४/२.३९.२९४( देवी के क्रोध के सिंह बनने का कथन ; अग्निमय पाश द्वारा सिंह का बन्धन ), विष्णु १.१.१७ ( वसिष्ठ द्वारा क्रोध से उत्पन्न अनर्थ का कथन ), विष्णुधर्मोत्तर ३.२४६ ( क्रोध के दोषों का वर्णन ), स्कन्द १.२.२९.३६ (  पार्वती - मुख से सिंह रूप क्रोध के नि:सृत होने का उल्लेख ), १.२.६२.१३( बाल रूप धारी रुद्र द्वारा कालिका के क्रोध रूप दुग्ध का पान, क्रोध का शिव के कण्ठ का विष बनना ), ३.१.४९.४३(क्रोध की सिंह रूप में कल्पना), ५.२.२५.२९ ( ब्राह्मणों के क्रोध की उग्रता का कथन : सागर को अपेय बनाना आदि ), ५.२.२५.४० ( क्रोध से श्री की रक्षा करने का निर्देश ), ५.२.५५.११( काली / गौरी के क्रोध से सिंह की उत्पत्ति का उल्लेख ), ५.३.१८१.१६ ( क्रोध से तप के नष्ट होने का उल्लेख ) । krodha

 

क्रोधन गणेश २.११४.१५ ( सिन्धु - सेनानी, कार्त्तवीर्य का पाश से बन्धन, हिरण्यगर्भ द्वारा क्रोधन का वध ), पद्म ५.५७.६४ ( राम से सीता के वियोग में हेतु बने क्रोधन नामक रजक का पूर्वजन्म का वृत्तान्त तथा अन्त्यज योनि प्राप्ति हेतु का कथन ), ब्रह्माण्ड ३.४.३५.९४( शंकर की ११ कलाओं में से एक ), भागवत ९.२२.११ ( अयुत - पुत्र, देवतिथि - पिता, कुरु वंश ), मत्स्य २०.३ ( कौशिक ऋषि के सात पुत्रों में से एक, गर्ग मुनि - शिष्य ), १७९.२९( क्रोधनी : अन्धकासुर के रक्तपान हेतु महादेव द्वारा सृष्ट एक मानस मातृका ), २००.७ ( क्रोधिन : वसिष्ठ वंशज एक ऋषि ), २०१.३७ ( पांच श्याम पराशर वंशीय ऋषियों में से एक ), कथासरित् १०.२.८४ ( वज्रसार - मित्र क्रोधन द्वारा वज्रसार को उसकी पत्नी के परपुरुष में आसक्त होने की सूचना दिए जाने का कथन ) । krodhana

 

क्रोधवश भागवत ५.२४.२९ ( महातल - निवासी काद्रवेय नागों के क्रोधवश नामक समुदाय की गरुड से भीतता का उल्लेख ), ८.१०.३४ ( देवासुर - संग्राम में क्रोधवशों के साथ रुद्रगणों के संग्राम का उल्लेख ) ।

 

क्रोधवशा ब्रह्म १.१.२१५ ( क्रोधवशा से क्रोधवश गण नामक दंष्ट्रधारी राक्षसों की उत्पत्ति का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड २.३.७.१७१ (मृगी, मृगमन्दा आदि बारह पुत्रियों की माता, क्रोधवशा के वंश का वर्णन ), भागवत ६.६.२६, २८ ( कश्यप की तेरह पत्नियों में से एक, सर्पों तथा दन्दशूक आदि की माता ), मत्स्य ६.४३ ( क्रोधवशा से क्रोधवश नामक दंष्ट्रधारी राक्षसों की उत्पत्ति, भीमसेन द्वारा वध ), १४६.१८ ( कश्यप की तेरह पत्नियों में से एक, कश्यप - पत्नियों से स्थावर - जङ्गम रूप नाना प्रकार के प्राणियों के जन्म का उल्लेख ), वायु ६६.५४ ( दक्ष - पुत्री, कश्यप - पत्नी ), विष्णु १.१५.१२५ ( काश्यप की १३ पत्नियों में से एक ), १.२१.२३ ( क्रोधवशा से क्रोधवश गण की उत्पत्ति ) । krodhavashaa

 

क्रोधा ब्रह्माण्ड २.३.६.३८ ( क्रोधा के गायन में उत्तम दस पुत्रों के नामों का कथन, तु. वायु ६८.३८/२.७.३८ में प्रवाही ), २.३.७.१७१ ( क्रोधा की मृगी, मृगमन्दा प्रभृति १२ कन्याओं के पुलह - भार्याएं होने का उल्लेख, वंश वर्णन ), २.३.७.४६६ ( क्रोधा के अध्ययनशीला होने का उल्लेख ), २.३.७.४६७ ( शुचिशीला होने का उल्लेख ), मत्स्य १७१.२९ ( दक्ष प्रजापति की बारह कन्याओं में से एक ; मरीचि - पुत्र कश्यप की बारह पत्नियों में से एक ), वायु ६९.१९८ ( क्रोधा से क्रोध के वश में रहने वाली प्रजाओं की उत्पत्ति, क्रोधा की बारह कन्याओं का पुलह ऋषि की पत्नियां बनना, क्रोधा के वंश का वर्णन ) । krodhaa

 

क्रोश वराह २१५.९० ( क्रोशोदक तीर्थ में स्नान से समस्त पापों से मुक्ति का उल्लेख ), वामन ९०.२७( महाक्रोशी में विष्णु की हंसयुक्त नाम से प्रतिष्ठा का उल्लेख ), शिव ४.२२.९( प्रकृति व पुरुष के सम्मुख तप हेतु पञ्च क्रोशात्मक भूमि/काशी के प्रकट होने का कथन ), स्कन्द २.३.१.२९( क्रोशी : असी व वरुणा के मध्य में पंच क्रोशी तीर्थ का संक्षिप्त माहात्म्य ), लक्ष्मीनारायण १.३७१.४ ( नरक के कुण्डों के क्रोश मानों का कथन ) ; द्र. पञ्चक्रोशी । krosha

 

क्रोष्टा भागवत ९.२३.२०, ३० ( यदु के चार पुत्रों में से एक, वृजिनवान् - पिता), मत्स्य १९६.८ ( त्र्यार्षेय प्रवर गोत्र प्रवर्तक आंगिरस ऋषियों में से एक ), १९६.२२ ( पंचार्षेय प्रवर आंगिरस ऋषियों में से एक ), हरिवंश १.३३.१ ( यदु के पांच पुत्रों में से एक, यदुवंश ), लक्ष्मीनारायण ३.२२७.७९ ( देश्यावन नामक कीशपालक के कीश नाट्य में हरि नाट्य का आरोपण करते हुए क्रोष्टा को अहंकार का प्रतीक मानकर विष्णु को समर्पित करने का कथन ) । kroshtaa

 

क्रोष्टु अग्नि २७५.१२ ( क्रोष्टु वंश का वर्णन ; वृजिनीवान् - पिता, क्रोष्टु वंश में स्वयं श्रीहरि के जन्म धारण का कथन ), कूर्म १.२४ ( वज्रवान् - पिता, क्रोष्टु वंश का वर्णन ), पद्म १.१३.१( वृजिनीवान् - पिता, क्रोष्टु वंश का वर्णन ), ब्रह्माण्ड २.३.६९.२ ( यदु के सहस्रजित् प्रभृति पांच पुत्रों में से एक ),   २.३.७०.१४ ( क्रोष्टु वंश का वर्णन, वृजिनीवान् - पिता ), मत्स्य ४३.७ ( यदु के पांच पुत्रों में से एक, यदुवंश ), ४३.४६ ( कार्तवीर्य अर्जुन के सौ पुत्रों में से एक ), ४४.१४ ( क्रोष्टु वंश का वर्णन ), विष्णु ४.११.५ ( यदु के ४ पुत्रों में से एक ), ४.१२.१ ( यदु -पुत्र क्रोष्टु के पुत्र रूप में ध्वजिनीवान् का उल्लेख ) । kroshtu

 

क्रोष्टुकि मार्कण्डेय ४५ ( क्रौष्टुकि का मार्कण्डेय से सृष्टि विषयक प्रश्न ), ४५.१६ ( मार्कण्डेय मुनि द्वारा द्विजपुत्र क्रौष्टुकि को सृष्टि, प्रपञ्च, स्थिति प्रभृति ज्ञान का कथन ), वायु ३४.६३ (क्रोष्टुकि ऋषि द्वारा मेरु पद्म की कर्णिका के परिमण्डलाकार मान का उल्लेख ) ।

 

क्रोष्ट्री भविष्य ३.४.११.४२ ( नैर्ऋत ब्राह्मण का क्रोधवश नारद से स्वपत्नी के क्रोष्ट्री हो जाने का वर मांगना, ब्राह्मण - पत्नी का क्रोष्ट्री होना ) ।

 

क्रौञ्च कूर्म १.४९.२७ ( क्रौञ्च द्वीप के सप्त पर्वतों, नदियों के नामों का कथन, क्रौञ्च द्वीप के निवासियों द्वारा महादेव का अर्चन, प्रसाद स्वरूप सायुज्य, सारूप्य, सालोक्य तथा सामीप्य की प्राप्ति ), गणेश २.१३४.७ ( क्रौञ्च गन्धर्व को वामदेव से मूषक होने के शाप की प्राप्ति ), २.१३५.९ ( क्रौञ्च द्वारा सौभरि - पत्नी मनोमयी का धर्षण, सौभरि शाप से मूषक होना ), गरुड १.५६.१२ ( क्रौञ्च द्वीप में द्युतिमान् के ७ पुत्रों का आधिपत्य, सप्त पर्वतों तथा नदियों के नाम ), १.८८ ( क्रौञ्चुकि : मार्कण्डेय द्वारा क्रौञ्चुकि को पितृस्तोत्र का कथन ), १.२२५.२१, २८  ( कार्पास हरण तथा अग्रज के अपमान से प्राप्त योनि ), २.१५.८२ ( मृत्यु पश्चात् क्रूर क्रौञ्चपुर में जाने का उल्लेख ), २.१६.१९(छठें मास में प्रेत द्वारा प्राप्त पुर का नाम), २.२२.५९/२.३२.११३( क्रौञ्च द्वीप की शरीर में शिरा में स्थिति का उल्लेख ),  देवीभागवत ८.४.२४ ( क्रौञ्च द्वीप के प्रियव्रत - पुत्र घृतपृष्ठ द्वारा शासित होने का उल्लेख ), ८.१३.२ ( क्रौञ्च द्वीप का वर्णन ), नारद १.५०.६१ ( क्रौञ्च द्वारा मध्यम स्वर के वादन का उल्लेख ), पद्म ५.६६.१५०( मा निषाद प्रतिष्ठां इति श्लोक ), ६.४.४२( क्रौञ्च प्रसाद से स्वर्ण नामक अप्सरा द्वारा वृन्दा पुत्री को जन्म देने का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड १.२.१४.१३, २२ ( प्रियव्रत द्वारा क्रौञ्च द्वीप में द्युतिमान् का अभिषेक, द्युतिमान् के सात पुत्रों के नाम पर कौशलादि सात जनपदों का नामकरण ), १.२.१९.६५ ( क्रौञ्च द्वीप के सात पर्वतों, सात वर्षों तथा सात नदियों के नामों का कथन, दधिमण्डोदक समुद्र से परिवेष्टित ), भविष्य २.२.२.१ ( मण्डल निर्माण के एक प्रकार क्रौञ्चमान का वर्णन ), ३.४.२४.७८ ( द्वापर युग के तृतीय चरण में क्रौञ्च द्वीप की स्थिति, अन्य चरणों में अन्य द्वीपों की स्थिति का कथन ), भागवत ५.१.३२ ( प्रियव्रत के रथ चक्र की नेमि से बने हुए सात समुद्रों से निर्मित सात द्वीपों में से एक ), ५.२०.१८ ( क्रौञ्च द्वीप का वर्णन : क्षीर समुद्र से आवेष्टित, क्रौञ्च पर्वत की स्थिति से द्वीप का नामकरण, प्रियव्रत - पुत्र घृतपृष्ठ द्वारा अधिष्ठित, घृतपृष्ठ द्वारा द्वीप के सात विभाग करके सात पुत्रों को प्रदान करना, सातों विभागों में सात - सात पर्वतों तथा नदियों की स्थिति, पुरुष, ऋषभ, देवक और द्रविण नामक निवासियों द्वारा जल देवता की उपासना ), मत्स्य ६.३२ ( ताम्रा व कश्यप - पुत्री शुचि द्वारा धर्म के संयोग से हंस, सारस, क्रौञ्च आदि के प्रादुर्भूत होने का उल्लेख ), १३.७, १२३.३७ ( हिमालय व मेना - पुत्र क्रौञ्च पर्वत के नाम पर क्रौञ्च द्वीप के नामकरण का उल्लेख ), १२२.७८ ( क्रौञ्च द्वीप का वर्णन ), १६३.८८ ( हिरण्यकशिपु द्वारा प्रकम्पित पर्वतों में से एक ), मार्कण्डेय १५.१५ ( ज्येष्ठ भ्राता की अवमानना करने के फलस्वरूप क्रौञ्च योनि की प्राप्ति ), १५.२९ ( कार्पास हरण पर प्राप्त योनि ), वामन ५७.७७ ( गौतमी नदी द्वारा कुमार को क्रथ व क्रौञ्च गणों को प्रदान करने का उल्लेख ), ५८.१०९ ( प्रदक्षिणा क्रम में इन्द्र को प्रथम बतलाने पर स्कन्द द्वारा क्रौञ्च पर्वत के वध का उल्लेख ), ९०.४३ ( क्रौञ्च द्वीप में विष्णु का पद्मनाभ नाम से वास ), वायु ३०.३२ ( मैनाक - अनुज क्रौञ्च के नाम से क्रौञ्च द्वीप के नामकरण का उल्लेख ), ४४.१० ( केतुमाल देश का एक जनपद ), ५७.१८ ( क्रौञ्च संवत्सर के मनुष्यों के नौ हजार नब्बे वर्षों के बराबर होने का उल्लेख ), ६९.६० ( क्रौञ्च द्वीप के अन्तर्गत क्रौञ्च आदि सप्त पर्वतों, सप्त वर्षों तथा सप्त नदियों के नामों का कथन ), ७२.६ ( मैनाक - पुत्र ), १०८.७५/२.४६.७८( मुनि द्वारा मुण्डपृष्ठ पर क्रौञ्च रूप में तप करने का कथन ), विष्णु २.४.४६ ( कुश द्वीप से द्विगुण विस्तार युक्त क्रौञ्च द्वीप के अधिपति , वर्ष, पर्वत, नदी तथा निवासियों का कथन ), ३.४.२४ ( ऋग्वेद की तीन शाखाओं के प्रवर्त्तक तथा निरुक्त के निर्माता शाकपूर्ण के चार शिष्यों में से एक ), शिव २.४.११.१ ( बाणासुर से पीडित क्रौञ्च पर्वत का सहायतार्थ कुमार की शरण में आना, कुमार द्वारा बाणासुर का वध, क्रौञ्च पर्वत का निर्भय होकर स्वगृह गमन ), २.४.२०.२३ ( नारद वचनों का श्रवण कर क्रोधित स्कन्द का क्रौञ्च पर्वत पर गमन ), ५.१८.४५ ( क्रौञ्च द्वीप का वर्णन ), स्कन्द १.२.३२.१७८ ( बाण नामक महासुर का क्रौञ्च पर्वत पर छिपना, स्कन्द द्वारा पर्वत का भेदन कर बाण का वध ), १.२.३२.१८२ ( बाण वध हेतु क्रौञ्च पर्वत के भेदन से निर्मित छिद्र से हंस तथा क्रौञ्च आदि पक्षियों के मानसरोवर जाने का उल्लेख ), ३.३.१५.६( लोक में भ्रमण करते हुए वामदेव नामक शिवयोगी का क्रौञ्च वन में प्रवेश, बुभुक्षा - पीडित ब्रह्मराक्षस द्वारा ग्रहण, शिवयोगी के स्पर्श मात्र से ब्रह्मराक्षस को तृप्तिपूर्वक आनन्दानुभूति का कथन ), ५.१.५८.२३( मैनाक - पुत्र क्रौञ्च पर्वत पर अग्निष्वात्त पितरों के निवास का उल्लेख ), हरिवंश १.४६.२४ ( स्वर्ग में पीडित दैत्यों की सहायतार्थ मय दानव द्वारा स्व - पुत्र क्रौञ्च द्वारा निर्मित पार्वती माया को प्रकट करना, विष्णु - प्रेरित अग्नि तथा वायु द्वारा पार्वती माया को भस्म करना ), वा.रामायण १.२.१५ ( निषाद द्वारा क्रौञ्च मिथुन में से एक की हत्या पर वाल्मीकि के शोक का कथन ), १.२७.११ ( विश्वामित्र द्वारा राम को प्रदत्त अनेक अस्त्रों में क्रौञ्च अस्त्र का उल्लेख ), ६.६३.१९ ( राजा की दुर्बलता / चंचलता रूप छिद्र की क्रौञ्च पर्वत के छिद्र से तुलना ), लक्ष्मीनारायण १.१०८.३२ ( नारद के वचनों को सुनकर क्रुद्ध कार्तिकेय का क्रौञ्च पर्वत पर आगमन ), वायु १०८.७५, १०९.१६, १११.४४ ( गया में मुण्डपृष्ठ पर्वत पर स्थित क्रौञ्चपद तीर्थ में ऋषि द्वारा तप, क्रौञ्चपद में स्नान, तर्पण, पिण्डदान का माहात्म्य ), वा.रामायण ६.९६.२६( विराध वध क्रौञ्च वन में होने का उल्लेख ), ७.५९.२० ( ययाति - पुत्र यदु द्वारा क्रौञ्च वन में यातुधानों को जन्म देने का उल्लेख ), krauncha

Esoteric aspect of Krauncha

Vedic view of Krauncha

 

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